Common Charger-स्मार्टफोन्स और टैबलेट्स के लिए भारत अपनाएगा सामान्य चार्जर कानून, मध्य 2025 तक होगा लागू

भारत ने स्मार्टफोन्स और टैबलेट्स के लिए सामान्य चार्जर को अपनाने का निर्णय लिया है ताकि इलेक्ट्रॉनिक कचरे को कम किया जा सके और उपभोक्ताओं को सुविधाजनक चार्जिंग विकल्प प्रदान किया जा सके। यह निर्णय भारतीय सरकार के द्वारा उठाया गया है और इसका लाभ उपभोक्ताओं को होगा जो अब एक ही चार्जर का उपयोग करके अपने डिवाइस को चार्ज कर सकेंगे। यह पहल भारत के इलेक्ट्रॉनिक अफसरों के अनुसार मध्य 2025 तक लागू होगा और इससे इलेक्ट्रॉनिक कचरे की मात्रा कम होगी और पर्यावरण को भी बचाया जा सकेगा।
मंत्री अश्विनी वैष्णव ने इस निर्णय की घोषणा करते हुए बताया कि यह कदम उठाना आवश्यक था क्योंकि विभिन्न प्रकार के चार्जर्स के कारण न केवल पर्यावरणीय नुकसान हो रहा था, बल्कि उपभोक्ताओं को भी असुविधा का सामना करना पड़ रहा था। “हमारे देश में भी यह कदम उठाना जरूरी हो गया था क्योंकि विभिन्न प्रकार के चार्जर्स के कारण न केवल पर्यावरणीय नुकसान हो रहा था, बल्कि उपभोक्ताओं को भी असुविधा का सामना करना पड़ रहा था,” मंत्री ने कहा।
इस नए कानून के अनुसार, सभी स्मार्टफोन्स, टैबलेट्स और अन्य पोर्टेबल इलेक्ट्रॉनिक उपकरणों के लिए एक ही चार्जिंग पोर्ट अनिवार्य होगा, जो कि USB-C पोर्ट हो सकता है। इस निर्णय का मुख्य उद्देश्य इलेक्ट्रॉनिक कचरे को कम करना है, जो विभिन्न प्रकार के चार्जर्स के कारण बढ़ रहा है।
इस कानून के लिए सरकार ने उद्योग जगत से सलाह ली है और इस कदम का स्वागत उद्योग जगत के अधिकांश प्रमुख स्मार्टफोन निर्माताओं ने किया है। इस पहल का समर्थन करने के लिए एप्पल, सैमसंग, श्याओमी और अन्य प्रमुख कंपनियों ने भी इसे अपनाया है और अपने उत्पादों को इस नए मानक के अनुरूप तैयार करने की तैयारी शुरू कर दी है।

उपभोक्ताओं को होने वाले लाभ
विशेषज्ञों के अनुसार, इस कदम से उपभोक्ताओं को भी फायदा होगा क्योंकि अब उन्हें अलग-अलग चार्जर्स खरीदने की जरूरत नहीं पड़ेगी।इससे उनके पैसे की बचत होगी। दूसरा, उन्हें चार्जर ढूंढ़ने की परेशानी से निजात मिलेगी। एक ही प्रकार के चार्जर से सभी डिवाइसेस चार्ज किए जा सकेंगे, जिससे सुविधा में वृद्धि होगी।
ई-कचरे में कमी
ई-कचरे की समस्या बढ़ती हुई है और इसके साथ ही इलेक्ट्रॉनिक उपकरणों के उपयोग का भी विस्तार हो रहा है। इसके परिणामस्वरूप, ई-कचरे का निपटान एक बड़ी चुनौती बन रहा है। चार्जर्स का सामान्यीकरण करने से, अनावश्यक चार्जर्स की उत्पादन में कमी होगी और इससे ई-कचरे में कमी आएगी। यह पर्यावरण संरक्षण के लिए एक महत्वपूर्ण कदम होगा
पर्यावरण संरक्षण
आज के समय में पर्यावरण संरक्षण एक महत्वपूर्ण मुद्दा है। चार्जर्स का सामान्यीकरण न केवल ई-कचरे को कम करेगा, बल्कि इससे संसाधनों की बचत भी होगी। विभिन्न प्रकार के चार्जर्स के उत्पादन में उपयोग होने वाले कच्चे माल की खपत कम होगी। इसके अलावा, परिवहन और निपटान के दौरान कार्बन फुटप्रिंट में भी कमी आएगी।
कंपनियों की प्रतिक्रिया
कुछ कंपनियां नए तकनीकी उत्पादों और सेवाओं का स्वागत कर रही हैं ताकि वे अपने ग्राहकों को नए और बेहतर अनुभव प्रदान कर सकें। वहीं, कुछ कंपनियां इसे अपने व्यापार मॉडल पर असर डालने के लिए चिंतित हैं क्योंकि वे नए तकनीकी उत्पादों के आने से खतरे महसूस कर रही हैं।
सरकार की भूमिका
सरकार इस कानून को प्रभावी बनाने के लिए विभिन्न कंपनियों के साथ मिलकर काम कर रही है। इसके लिए एक समयसीमा निर्धारित की गई है, ताकि कंपनियों को अपने उत्पादों को नए कानून के अनुरूप बनाने के लिए पर्याप्त समय मिल सके।सरकार नियमित बैठकें कर रही है और हितधारकों की समस्याओं और सुझावों को ध्यान में रख रही है।
तकनीकी चुनौतियाँ
सामान्य चार्जर कानून को लागू करने में कुछ तकनीकी चुनौतियाँ भी हो सकती हैं। विभिन्न कंपनियों के चार्जर्स की कार्यप्रणाली और डिज़ाइन में अंतर होता है। उन्हें एक सामान्य डिज़ाइन और कार्यप्रणाली में बदलना एक बड़ी चुनौती हो सकती है। इसके अलावा, चार्जिंग स्पीड और पावर आउटपुट जैसे पहलुओं को भी ध्यान में रखना होगा, ताकि उपभोक्ताओं को उच्च गुणवत्ता और सुरक्षित चार्जिंग अनुभव प्राप्त हो सके।

यह एक महत्वपूर्ण विकल्प है जो उपभोक्ताओं के लिए वास्तव में एक बड़ी राहत होगी। इससे उन्हें अपने सभी उपकरणों को एक ही चार्जर से चार्ज करने की सुविधा मिलेगी। इससे न केवल उनकी आर्थिक बचत होगी, बल्कि उनके जीवन को भी आसान बनाने में मदद मिलेगी।
इस नए कानून के प्रभाव से, भारत वही चुनिंदा देशों में शामिल हो जाएगा जहां इलेक्ट्रॉनिक उपकरणों के लिए सामान्य चार्जर कानून को अपनाया गया है। यह कदम देश में डिजिटल इंडिया मिशन को और भी मजबूत करेगा और स्मार्टफोन और टैबलेट उपयोगकर्ताओं के लिए एक उपयुक्त और पर्यावरणीय अनुकूल चार्जिंग समाधान प्रदान करेगा।
2025 तक इस कानून के पूरी तरह से लागू होने की उम्मीद है, जिसके बाद सभी नए इलेक्ट्रॉनिक उपकरण एक ही प्रकार के चार्जिंग पोर्ट के साथ बाजार में उपलब्ध होंगे। सरकार और उद्योग जगत के इस सामूहिक प्रयास से देश में डिजिटल और पर्यावरणीय सुधार की दिशा में एक महत्वपूर्ण प्रगति होगी।.